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सुनन नसाई

नंबर 436

नंबर 436किताब 4, नंबर 42
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ حَاتِمٍ قَالَ: حَدَّثَنَا عَبِيدَةُ قَالَ: حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ الأَعْمَشُ عَنْ حَبِيبِ بْنِ أَبِي ثَابِتٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنْ عَلِيٍّ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: كُنْتُ رَجُلاً مَذَّاءً فَأَمَرْتُ رَجُلاً فَسَأَلَ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ: «فِيهِ الْوُضُوءُ»
It was narrated that 'Ali, may Allah be please with him, said:"I was a man who emotted a great deal of Madhi. I told a man to ask the Prophet (ﷺ) (about that) and he said: 'Wudu' (is required) for that
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Ghusl and Tayammum

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।