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सुनन नसाई

नंबर 4209

नंबर 4209किताब 39, नंबर 61
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ، عَنْ طَارِقِ بْنِ شِهَابٍ، أَنَّ رَجُلاً، سَأَلَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَقَدْ وَضَعَ رِجْلَهُ فِي الْغَرْزِ أَىُّ الْجِهَادِ أَفْضَلُ قَالَ ‏ "‏ كَلِمَةُ حَقٍّ عِنْدَ سُلْطَانٍ جَائِرٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Tariq bin Shihab that:a man asked the Prophet, when he had put his leg in the stirrup: "Which kind of Jihad is best?'" He said: " a word of truth spoken before an unjust rulers
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of al-Bay'ah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।