सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 4180

नंबर 4180किताब 39, नंबर 32
أَخْبَرَنَا الْحَسَنُ بْنُ أَحْمَدَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو الرَّبِيعِ، قَالَ أَنْبَأَنَا حَمَّادٌ، قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ مُحَمَّدٍ، عَنْ أُمِّ عَطِيَّةَ، قَالَتْ أَخَذَ عَلَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْبَيْعَةَ عَلَى أَنْ لاَ نَنُوحَ ‏.‏
It was narrated that Umm 'Atiyyah said:"The Messenger of Allah accepted our pledge that we would not wail (for the dead)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of al-Bay'ah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।