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सुनन नसाई

नंबर 4171

नंबर 4171किताब 39, नंबर 23
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ يَحْيَى بْنِ هَانِئٍ، عَنْ نُعَيْمِ بْنِ دِجَاجَةَ، قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، يَقُولُ لاَ هِجْرَةَ بَعْدَ وَفَاةِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
It was narrated that Nu'aim bin Dijajah said:"I heard 'Umar bin Al-Khattab say: 'There is no more emigration (Hijrah) after the death of the Messenger of Allah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of al-Bay'ah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।