सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3954

नंबर 3954किताब 36, नंबर 16
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الْحَكَمُ بْنُ نَافِعٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَا عَائِشَةُ هَذَا جِبْرِيلُ وَهُوَ يَقْرَأُ عَلَيْكِ السَّلاَمَ ‏"‏ ‏.‏ مِثْلَهُ سَوَاءٌ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ هَذَا الصَّوَابُ وَالَّذِي قَبْلَهُ خَطَأٌ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"The Messenger of Allah said: 'O 'Aishah, this is Jibril and he is sending greetings of Salam to you.'" The same
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · The Book of the Kind Treatment of Women

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।