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सुनन नसाई

नंबर 3841

नंबर 3841किताब 35, नंबर 81
أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ، عَنْ أَبِي عَمْرٍو، - وَهُوَ الأَوْزَاعِيُّ - عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الزُّبَيْرِ الْحَنْظَلِيِّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، رضى الله عنهما قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ نَذْرَ فِي مَعْصِيَةٍ وَكَفَّارَتُهَا كَفَّارَةُ يَمِينٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Imran bin Husain, may Allah be pleased with him, said:"The Messenger of Allah said: 'There is no vow to commit an act of disobedience, and its expiation is the expiation for an oath
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · The Book of Agriculture

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।