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सुनन नसाई

नंबर 3778

नंबर 3778किताब 35, नंबर 18
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، عَنْ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنِ الأَشْعَثِ بْنِ سُلَيْمٍ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ سُوَيْدِ بْنِ مُقَرِّنٍ، عَنِ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ، قَالَ أَمَرَنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِسَبْعٍ أَمَرَنَا بِاتِّبَاعِ الْجَنَائِزِ وَعِيَادَةِ الْمَرِيضِ وَتَشْمِيتِ الْعَاطِسِ وَإِجَابَةِ الدَّاعِي وَنَصْرِ الْمَظْلُومِ وَإِبْرَارِ الْقَسَمِ وَرَدِّ السَّلاَمِ ‏.‏
Al-Bara' bin 'Azib said:"The Messenger of Allah commanded us to do seven things: He commanded us to attend funerals, visit the sick, to reply (say: Yarhamuk Allah [may Allah have mercy on you]) to one who sneezes, to accept invitations, to support the oppressed, to fulfill oaths (when adjured by another) and to return greetings of Salaam
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · The Book of Agriculture

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।