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सुनन नसाई

नंबर 3760

नंबर 3760किताब 34, नंबर 42
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أُتِيَ بِلَحْمٍ فَقَالَ ‏"‏ مَا هَذَا ‏"‏ ‏.‏ فَقِيلَ تُصُدِّقَ بِهِ عَلَى بَرِيرَةَ ‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ هُوَ لَهَا صَدَقَةٌ وَلَنَا هَدِيَّةٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Anas that some meat was brought to the Messenger of Allah and he said:"What is this?" It was said: "It was given in charity to Barirah." He said: "It is charity for her and a gift for us
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of 'Umra

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।