सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3740

नंबर 3740किताब 34, नंबर 22
أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ خَالِدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عُمَرُ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، حَدَّثَنَا ابْنُ شِهَابٍ، قَالَ وَأَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ، أَنْبَأَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ أُعْمِرَ عُمْرَى فَهِيَ لَهُ وَلِعَقِبِهِ يَرِثُهَا مَنْ يَرِثُهُ مِنْ عَقِبِهِ ‏"‏ ‏.‏
Al-Awza'i narrated from Az-Zuhri, from 'Urwah, from Jabir, who said:"The Messenger of Allah said: 'Whoever is given something on the basis of 'Umra, it belongs to him and to his descendants, and is inherited by those who inherit from him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of 'Umra

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।