सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3728

नंबर 3728किताब 34, नंबर 10
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ أَنْبَأَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ إِسْرَائِيلَ، عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ، عَنْ عَطَاءٍ، قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنِ الْعُمْرَى وَالرُّقْبَى ‏.‏ قُلْتُ وَمَا الرُّقْبَى قَالَ يَقُولُ الرَّجُلُ لِلرَّجُلِ هِيَ لَكَ حَيَاتَكَ ‏.‏ فَإِنْ فَعَلْتُمْ فَهُوَ جَائِزَةٌ ‏.‏
Abdul-Karim narrated from 'Ata', who said:"The Messenger of Allah forbade 'Umra and Ruqba." I said: "What is Ruqba?" He said: "When one man says to another: 'This belongs to you for the rest of your life.' But if you do that, it is permissible
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of 'Umra

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।