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सुनन नसाई

नंबर 3713

नंबर 3713किताब 33, नंबर 8
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ لاَ تَصْلُحُ الْعُمْرَى وَلاَ الرُّقْبَى فَمَنْ أَعْمَرَ شَيْئًا أَوْ أَرْقَبَهُ فَإِنَّهُ لِمَنْ أُعْمِرَهُ وَأُرْقِبَهُ حَيَاتَهُ وَمَوْتَهُ ‏.‏ أَرْسَلَهُ حَنْظَلَةُ ‏.‏
(A different chain) from Hajjaj, from Abu Az-Zubair, from Tawus, from Ibn 'Abbas, who said:"'Umra and Ruqba are not proper. Whoever gives something on the basis of 'Umra or Ruqba, it belongs to the one to whom he gave it on that basis, both during his lifetime and after his death." Hanzalah narrated it in Mursal form
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · The Book of ar-Ruqba

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।