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सुनन नसाई

नंबर 3672

नंबर 3672किताब 31, नंबर 1
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ حُمَيْدٍ، ح وَأَنْبَأَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، عَنْ سُفْيَانَ، قَالَ سَمِعْنَاهُ مِنَ الزُّهْرِيِّ، أَخْبَرَنِي حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، وَمُحَمَّدُ بْنُ النُّعْمَانِ، عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ، أَنَّ أَبَاهُ، نَحَلَهُ غُلاَمًا فَأَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يُشْهِدُهُ فَقَالَ ‏"‏ أَكُلَّ وَلَدِكَ نَحَلْتَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ لاَ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَارْدُدْهُ ‏"‏ ‏.‏ وَاللَّفْظُ لِمُحَمَّدٍ ‏.‏
It was narrated from An-Nu'man bin Bashir that his father gave him a slave as a present, then he came to the Prophet to ask him to bear witness (to that). He said:"Have you given a present to all of your children?" He said: "No." He said: "Then take it back." This wording is that of (one of the narrators) Muhammad
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · The Book of Presents

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।