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सुनन नसाई

नंबर 3655

नंबर 3655किताब 30, नंबर 45
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ الأَزْهَرِ، قَالَ حَدَّثَنَا رَوْحُ بْنُ عُبَادَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا زَكَرِيَّا بْنُ إِسْحَاقَ، قَالَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَجُلاً، قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ أُمَّهُ تُوُفِّيَتْ أَفَيَنْفَعُهَا إِنْ تَصَدَّقْتُ عَنْهَا قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ ‏"‏‏.‏ قَالَ فَإِنَّ لِي مَخْرَفًا فَأُشْهِدُكَ أَنِّي قَدْ تَصَدَّقْتُ بِهِ عَنْهَا‏.‏
It was narrated from Ibn 'Abbas that a man said:"O Messenger of Allah, my mother died; will it benefit her if I give in charity on her behalf?" He said: "Yes." He said: "I have a garden and I ask you to bear witness that I am giving it in charity on her behalf
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · The Book of Wills

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।