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सुनन नसाई

नंबर 3652

नंबर 3652किताब 30, नंबर 42
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا إِسْمَاعِيلُ، عَنِ الْعَلاَءِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَجُلاً، قَالَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم إِنَّ أَبِي مَاتَ وَتَرَكَ مَالاً وَلَمْ يُوصِ فَهَلْ يُكَفِّرُ عَنْهُ أَنْ أَتَصَدَّقَ عَنْهُ قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ ‏"‏‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that a man said to the Prophet:"My father died and left behind wealth, but he did not leave a will. Will it expiate for him if I give charity on his behalf?
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · The Book of Wills

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।