أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ مَنْبُوذٍ، عَنْ أُمِّهِ، أَنَّ مَيْمُونَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَضَعُ رَأْسَهُ فِي حِجْرِ إِحْدَانَا فَيَتْلُو الْقُرْآنَ وَهِيَ حَائِضٌ وَتَقُومُ إِحْدَانَا بِخُمْرَتِهِ إِلَى الْمَسْجِدِ فَتَبْسُطُهَا وَهِيَ حَائِضٌ .
Maimunah said:"The Messenger of Allah (ﷺ) used to lay his head in the lap of one of us and recite Qur'an while she was menstruating, and one of us would take the mat to the Masjid and spread it out when she was menstruating
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAbu Ghuddah
HasanAl-Albani
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।