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सुनन नसाई

नंबर 3610

नंबर 3610किताब 29, नंबर 17
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ وَهْبٍ، قَالَ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو عَبْدِ الرَّحِيمِ، قَالَ حَدَّثَنِي زَيْدُ بْنُ أَبِي أُنَيْسَةَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ، قَالَ لَمَّا حُصِرَ عُثْمَانُ فِي دَارِهِ اجْتَمَعَ النَّاسُ حَوْلَ دَارِهِ - قَالَ - فَأَشْرَفَ عَلَيْهِمْ ‏.‏ وَسَاقَ الْحَدِيثَ ‏.‏
It was narrated that 'Abdur-Rahman Al-Sulami said:"When 'Uthman was besieged in his house, the people gathered around his house and he looked out over them" and he quoted the same Hadith
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · The Book of Endowments

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।