सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3531

नंबर 3531किताब 27, नंबर 143
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ، قَالَ حَدَّثَنَا وَرْقَاءُ، عَنِ ابْنِ أَبِي نَجِيحٍ، قَالَ عَطَاءٌ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، نَسَخَتْ هَذِهِ الآيَةُ عِدَّتَهَا فِي أَهْلِهَا فَتَعْتَدُّ حَيْثُ شَاءَتْ وَهُوَ قَوْلُ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ ‏{‏ غَيْرَ إِخْرَاجٍ ‏}‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Abbas that this Verse abrogated the woman's 'Iddah among her family, and she may observe her 'Iddah wherever she wants. That is the saying of Allah, the Mighty and Sublime:without turning them out
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।