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सुनन नसाई

नंबर 3526

नंबर 3526किताब 27, नंबर 138
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَعْمَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَبَّانُ، قَالَ حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ كَثِيرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الزُّهْرِيُّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَحِلُّ لاِمْرَأَةٍ تُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَالْيَوْمِ الآخِرِ أَنْ تَحِدَّ فَوْقَ ثَلاَثَةِ أَيَّامٍ إِلاَّ عَلَى زَوْجٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Aishah that the Prophet said:"It is not permissible for a woman who believes in Allah and the Last Day to mourn for more than three days, except for her husband
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।