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सुनन नसाई

नंबर 3465

नंबर 3465किताब 27, नंबर 77
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، قَالَ أَنْبَأَنَا هَارُونُ بْنُ رِئَابٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُبَيْدِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَجُلاً، قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ تَحْتِي امْرَأَةً لاَ تَرُدُّ يَدَ لاَمِسٍ قَالَ ‏"‏ طَلِّقْهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ إِنِّي لاَ أَصْبِرُ عَنْهَا ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَأَمْسِكْهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ هَذَا خَطَأٌ وَالصَّوَابُ مُرْسَلٌ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Abbas that a man said:"O Messenger of Allah, I have a wife who does not object if anyone touches her." He said: "Divorce her." He said: "I cannot live without her." He said: "Then keep her
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।