सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3446

नंबर 3446किताब 27, नंबर 58
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ مَسْعَدَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ مَوْهَبٍ، عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُحَمَّدٍ، قَالَ كَانَ لِعَائِشَةَ غُلاَمٌ وَجَارِيَةٌ قَالَتْ فَأَرَدْتُ أَنْ أُعْتِقَهُمَا فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ ابْدَئِي بِالْغُلاَمِ قَبْلَ الْجَارِيَةِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Al-Qasim bin Muhammad said:"Aishah had a male slave and a female slave. She said: 'I wanted to set them free, and I mentioned that to the Messenger of Allah. He said: Start with the male slave before the female slave
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।