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सुनन नसाई

नंबर 3443

नंबर 3443किताब 27, नंबर 55
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ بْنِ صُدْرَانَ، عَنْ خَالِدِ بْنِ الْحَارِثِ، قَالَ حَدَّثَنَا أَشْعَثُ، - وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ - عَنْ عَاصِمٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَدْ خَيَّرَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم نِسَاءَهُ فَلَمْ يَكُنْ طَلاَقًا ‏.‏
It was narrated from Masruq that 'Aishah said:"The Prophet gave his wives the choice and that was not a divorce
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।