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सुनन नसाई

नंबर 3435

नंबर 3435किताब 27, नंबर 47
أَخْبَرَنِي مُوسَى بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْجُعْفِيُّ، عَنْ زَائِدَةَ، عَنْ شَيْبَانَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ زُرَارَةَ بْنِ أَوْفَى، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ تَعَالَى تَجَاوَزَ لأُمَّتِي عَمَّا حَدَّثَتْ بِهِ أَنْفُسَهَا مَا لَمْ تَكَلَّمْ أَوْ تَعْمَلْ بِهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Prophet said:"Allah, the Most High, has forgiven my Ummah for whatever enters the mind, so long as it is not spoken of or put into action
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।