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सुनन नसाई

नंबर 3414

नंबर 3414किताब 27, नंबर 26
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَلْقَمَةَ بْنِ مَرْثَدٍ، قَالَ سَمِعْتُ سَالِمَ بْنَ رَزِينٍ، يُحَدِّثُ عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فِي الرَّجُلِ تَكُونُ لَهُ الْمَرْأَةُ يُطَلِّقُهَا ثُمَّ يَتَزَوَّجُهَا رَجُلٌ آخَرُ فَيُطَلِّقُهَا قَبْلَ أَنْ يَدْخُلَ بِهَا فَتَرْجِعَ إِلَى زَوْجِهَا الأَوَّلِ قَالَ ‏ "‏ لاَ حَتَّى تَذُوقَ الْعُسَيْلَةَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that the Prophet said, concerning a man who had a wife and he divorced her, then she married another man who divorced her before consummating the marriage with her, and (it was asked) whether she could go back to her first husband:"No, not until she tastes his sweetness
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 27 · The Book of Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।