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सुनन नसाई

नंबर 3379

नंबर 3379किताब 26, नंबर 184
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ سَعْدِ بْنِ الْحَكَمِ بْنِ أَبِي مَرْيَمَ، قَالَ حَدَّثَنَا عَمِّي، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُمَارَةُ بْنُ غَزِيَّةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ تَزَوَّجَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهِيَ بِنْتُ سِتِّ سِنِينَ وَبَنَى بِهَا وَهِيَ بِنْتُ تِسْعٍ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"The Messenger of Allah married me when I was six, and consummated the marriage with me when I was nine
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।