सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3377

नंबर 3377किताब 26, नंबर 182
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا وَكِيعٌ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ تَزَوَّجَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي شَوَّالٍ وَأُدْخِلْتُ عَلَيْهِ فِي شَوَّالٍ فَأَىُّ نِسَائِهِ كَانَ أَحْظَى عِنْدَهُ مِنِّي ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"The Prophet married me in Shawwal, and he consummated the marriage with me in Shawwal, and which of his wives find more favor with him than me?
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।