सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3347

नंबर 3347किताब 26, नंबर 152
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْهَادِ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، قَالَ سَأَلْتُ عَائِشَةَ عَنْ ذَلِكَ، فَقَالَتْ فَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَلَى اثْنَتَىْ عَشْرَةَ أُوقِيَّةً وَنَشٍّ وَذَلِكَ خَمْسُمِائَةِ دِرْهَمٍ ‏.‏
It was narrated that Abu Salamah said:"I asked 'Aishah about that and she said: 'The Messenger of Allah got married (and married his daughters) for twelve Uqiyah and a Nashsh'" which is five hundred Dirhams
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।