सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 3297

नंबर 3297किताब 26, नंबर 102
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَاصِمٌ، قَالَ قَرَأْتُ عَلَى الشَّعْبِيِّ كِتَابًا فِيهِ عَنْ جَابِرٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تُنْكَحُ الْمَرْأَةُ عَلَى عَمَّتِهَا وَلاَ عَلَى خَالَتِهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ سَمِعْتُ هَذَا مِنْ جَابِرٍ ‏.‏
Asim said:"I read a book to Ash-Sha'bi in which it was narrated from Jabir that the Prophet said: 'A woman should not be taken as a co-wife to her paternal aunt or her maternal aunt.' He said: 'I heard that from Jabir
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।