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सुनन नसाई

नंबर 3264

नंबर 3264किताब 26, नंबर 69
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ زِيَادِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْفَضْلِ، عَنْ نَافِعِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الثَّيِّبُ أَحَقُّ بِنَفْسِهَا وَالْبِكْرُ يَسْتَأْمِرُهَا أَبُوهَا وَإِذْنُهَا صُمَاتُهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Abbas that the Prophet said:"A previously married woman has more right (to decide) about herself (with regard to marriage), and a virgin should be consulted by her father, and her permission is her silence
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।