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सुनन नसाई

नंबर 3205

नंबर 3205किताब 26, नंबर 10
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُبَارَكِ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو هِشَامٍ، - وَهُوَ الْمُغِيرَةُ بْنُ سَلَمَةَ الْمَخْزُومِيُّ - قَالَ حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ عُبَيْدِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا تُوُفِّيَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حَتَّى أَحَلَّ اللَّهُ لَهُ أَنْ يَتَزَوَّجَ مِنَ النِّسَاءِ مَا شَاءَ ‏.‏
Narrated 'Aishah:It was narrated that 'Aishah said: "The Messenger of Allah did not die until Allah permitted him to marry whatever women he wanted
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · The Book of Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।