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सुनन नसाई

नंबर 3154

नंबर 3154किताब 25, नंबर 70
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، قَالَ سَمِعْتُ جَابِرًا، يَقُولُ قَالَ رَجُلٌ يَوْمَ أُحُدٍ أَرَأَيْتَ إِنْ قُتِلْتُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ فَأَيْنَ أَنَا قَالَ ‏ "‏ فِي الْجَنَّةِ ‏"‏ ‏.‏ فَأَلْقَى تَمَرَاتٍ فِي يَدِهِ ثُمَّ قَاتَلَ حَتَّى قُتِلَ ‏.‏
It was narrated that 'Amr said:"I heard Jabir say: 'A man said on the day of Uhud: If I am killed in the cause of Allah, where do you think I will be? He said: In Paradise. He threw down some dates that were in his hand and fought until he was killed
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।