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सुनन नसाई

नंबर 3129

नंबर 3129किताब 25, नंबर 45
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الْحَكَمِ، عَنْ شُعَيْبٍ، عَنِ اللَّيْثِ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي جَعْفَرٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ، عَنْ أَبِي مُرَاوِحٍ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، أَنَّهُ سَأَلَ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَىُّ الْعَمَلِ خَيْرٌ قَالَ ‏ "‏ إِيمَانٌ بِاللَّهِ وَجِهَادٌ فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Dharr that he asked the prophet of Allah (ﷺ) which deed was best. He said:"Belief in Allah and Jihad in the cause of Allah, the Mighty and Sublime
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।