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सुनन नसाई

नंबर 3117

नंबर 3117किताब 25, नंबर 33
أَخْبَرَنَا عِصْمَةُ بْنُ الْفَضْلِ، قَالَ حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ حُبَابٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ شُرَيْحٍ، قَالَ سَمِعْتُ مُحَمَّدَ بْنَ شُمَيْرٍ الرُّعَيْنِيَّ، يَقُولُ سَمِعْتُ أَبَا عَلِيٍّ التُّجِيبِيَّ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا رَيْحَانَةَ، يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ حُرِّمَتْ عَيْنٌ عَلَى النَّارِ سَهِرَتْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏
Abu 'Ali At-Tujibi (said) that he heard Abu Raihanah say:"I heard the Messenger of Allah (ﷺ) say: 'The eye that stays awake in the cause of Allah will be forbidden to the Fire
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।