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सुनन नसाई

नंबर 3113

नंबर 3113किताब 25, नंबर 29
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا عَرْعَرَةُ بْنُ الْبِرِنْدِ، وَابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَمْرٍو، عَنْ صَفْوَانَ بْنِ أَبِي يَزِيدَ، عَنْ حُصَيْنِ بْنِ اللَّجْلاَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَجْتَمِعُ غُبَارٌ فِي سَبِيلِ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ وَدُخَانُ جَهَنَّمَ فِي مَنْخَرَىْ مُسْلِمٍ أَبَدًا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Prophet (ﷺ) said:"The dust in the cause of Allah, the Mighty and Sublime, and the smoke of Hell will never be combined in the nostrils of a Muslim
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।