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सुनन नसाई

नंबर 3101

नंबर 3101किताब 25, नंबर 17
أَخْبَرَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الْبَرَاءِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم ثُمَّ ذَكَرَ كَلِمَةً مَعْنَاهَا قَالَ ‏"‏ ائْتُونِي بِالْكَتِفِ وَاللَّوْحِ ‏"‏ ‏.‏ فَكَتَبَ ‏{‏ لاَ يَسْتَوِي الْقَاعِدُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ ‏}‏ وَعَمْرُو بْنُ أُمِّ مَكْتُومٍ خَلْفَهُ فَقَالَ هَلْ لِي رُخْصَةٌ فَنَزَلَتْ ‏{‏ غَيْرُ أُولِي الضَّرَرِ ‏}‏ ‏.‏
It was narrated from Al-Bara' that the Prophet (ﷺ) said:"bring me a shoulder blade of a camel, or a tablet, and write: Not equal are those of the believers who sit (at home)." [1] 'Amr bin Umm Maktum was behind him and he said: "Is there a concession for me?" Then the following was revealed: "Except those who are disabled (by injury or are blind or lame)." [2] [1] An-Nisa' 4:95. [2] An-Nisa' 4:
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · The Book of Jihad

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।