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सुनन नसाई

नंबर 3068

नंबर 3068किताब 24, नंबर 451
أَخْبَرَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ حُرَيْثٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي الْبَدَّاحِ بْنِ عَدِيٍّ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم رَخَّصَ لِلرُّعَاةِ أَنْ يَرْمُوا يَوْمًا وَيَدَعُوا يَوْمًا ‏.‏
It was narrated from Abu al-Baddah bin'Adiyy, from father, that:the Prophet granted the camel herders a concession allowing them to stone the Jamrat on one day an not another
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।