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सुनन नसाई

नंबर 3048

नंबर 3048किताब 24, नंबर 431
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الْحَكَمِ، عَنْ أَشْهَبَ، أَنَّ دَاوُدَ بْنَ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، حَدَّثَهُمْ أَنَّ عَمْرَو بْنَ دِينَارٍ حَدَّثَهُ أَنَّ عَطَاءَ بْنَ أَبِي رَبَاحٍ حَدَّثَهُمْ أَنَّهُ، سَمِعَ ابْنَ عَبَّاسٍ، يَقُولُ أَرْسَلَنِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي ضَعَفَةِ أَهْلِهِ فَصَلَّيْنَا الصُّبْحَ بِمِنًى وَرَمَيْنَا الْجَمْرَةَ ‏.‏
Ata bin Abi Rabah told them that he heard Ibn Abbas say:"The Messenger of Allah sent me with the weak ones of his family to pray Subh in Mina and stone the Jamrah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।