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सुनन नसाई

नंबर 3046

नंबर 3046किताब 24, नंबर 429
أَخْبَرَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، فِي حَدِيثِهِ عَنْ أَبِي الأَحْوَصِ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنْ كَثِيرٍ، - وَهُوَ ابْنُ مُدْرِكٍ - عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ، قَالَ قَالَ ابْنُ مَسْعُودٍ وَنَحْنُ بِجَمْعٍ سَمِعْتُ الَّذِي، أُنْزِلَتْ عَلَيْهِ سُورَةُ الْبَقَرَةِ يَقُولُ فِي هَذَا الْمَكَانِ ‏ "‏ لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abdur-Rahman bin Yazid said:"When we were in Jam (Al-Muzadalifah), Ibn Masud said: 'I heard the one to whoem surat Al-Baqarah was revealed say, in this place: Labbaik Allahumma Labbaik
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।