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सुनन नसाई

नंबर 3039

नंबर 3039किताब 24, नंबर 422
أَخْبَرَنَا سَعِيدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، وَدَاوُدَ، وَزَكَرِيَّا، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ بْنِ مُضَرِّسٍ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَاقِفًا بِالْمُزْدَلِفَةِ فَقَالَ ‏ "‏ مَنْ صَلَّى مَعَنَا صَلاَتَنَا هَذِهِ هَا هُنَا ثُمَّ أَقَامَ مَعَنَا وَقَدْ وَقَفَ قَبْلَ ذَلِكَ بِعَرَفَةَ لَيْلاً أَوْ نَهَارًا فَقَدْ تَمَّ حَجُّهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Urwah bin Mudarris said:"I saw the Messenger of Allah stading in Al-Muzdalifah and he said: 'Whoever offers this prayer whith us here then stands with us and stood before that in Arafat by nightor by day, his Hajj is complete
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।