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सुनन नसाई

नंबर 3015

नंबर 3015किताब 24, नंबर 398
أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ، أَتَيْنَا جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ فَسَأَلْنَاهُ عَنْ حَجَّةِ النَّبِيِّ، صلى الله عليه وسلم فَحَدَّثَنَا أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ عَرَفَةُ كُلُّهَا مَوْقِفٌ ‏"‏ ‏.‏
Ja`far bin Muhammad said:"My father told me: 'We came to Jabir bin `Abdullah and asked him about the Hajj of the Prophet. He told us that the Prophet said: "All of Arafat is the place of standing
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।