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सुनन नसाई

नंबर 3004

नंबर 3004किताब 24, नंबर 387
أَخْبَرَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ فَضَالَةَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ، - وَهُوَ ابْنُ يَزِيدَ الْمُقْرِئُ - قَالَ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُلَىٍّ، قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ يَوْمَ عَرَفَةَ وَيَوْمَ النَّحْرِ وَأَيَّامَ التَّشْرِيقِ عِيدُنَا أَهْلَ الإِسْلاَمِ وَهِيَ أَيَّامُ أَكْلٍ وَشُرْبٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Uqbah bin Amir that the Messenger of Allah said:"The day of Arafat and the day of sacrifice and the day of At-Tashriq are our Id, the people of Islam, and they are days of eating and drinking
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।