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सुनन नसाई

नंबर 2998

नंबर 2998किताब 24, नंबर 381
أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ حَبِيبِ بْنِ عَرَبِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الأَنْصَارِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي سَلَمَةَ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ غَدَوْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ مِنًى إِلَى عَرَفَةَ فَمِنَّا الْمُلَبِّي وَمِنَّا الْمُكَبِّرُ ‏.‏
It was narrated that Ibn Umar said:"We left Mina with the Messenger of Allah for AArafat, and some of us were reciting the Talbiyah and some reciting the Takbir
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।