أَخْبَرَنَا عِمْرَانُ بْنُ يَزِيدَ، قَالَ أَنْبَأَنَا شُعَيْبٌ، قَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي جَعْفَرُ بْنُ مُحَمَّدٍ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَاهُ، يُحَدِّثُ أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرًا، عَنْ حَجَّةِ النَّبِيِّ، صلى الله عليه وسلم ثُمَّ وَقَفَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَلَى الصَّفَا يُهَلِّلُ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ وَيَدْعُو بَيْنَ ذَلِكَ .
Jafar bin Muhammad narrated, that he heard his father narrate, that he heard Jabir, speak of the Pilgrimage of the Prophet:"The Prophet stood atop as-Safa proclaiming the Tahlil of Allah (saying Lal ilaha illallah) and supplicating in between that
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
Isnaad SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।