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सुनन नसाई

नंबर 2959

नंबर 2959किताब 24, नंबर 342
أَخْبَرَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ يَحْيَى، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ كَثِيرِ بْنِ كَثِيرٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ الْمُطَّلِبِ بْنِ أَبِي وَدَاعَةَ، قَالَ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم حِينَ فَرَغَ مِنْ سُبُعِهِ جَاءَ حَاشِيَةَ الْمَطَافِ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ وَلَيْسَ بَيْنَهُ وَبَيْنَ الطَّوَّافِينَ أَحَدٌ ‏.‏
It was narrated that Al-Muttalib bin Wadaah said:"I saw the Prophet when he had completed his seven (circuits of Tawaf); he came to the edge of the Mataf and prayed two Rakahs, with nothing in between him and people who were circumambulating." (Daif)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।