सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2952

नंबर 2952किताब 24, नंबर 335
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ مَا تَرَكْتُ اسْتِلاَمَ هَذَيْنِ الرُّكْنَيْنِ مُنْذُ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَسْتَلِمُهُمَا الْيَمَانِيَ وَالْحَجَرَ فِي شِدَّةٍ وَلاَ رَخَاءٍ ‏.‏
It was narrated that Nafi said:"Abdullah, may Allah be pleased with him, said: "I have not failed to touch these two corners since I saw the Messenger of Allah touching them, the Yemeni Corner and Black Stone, either when it is difficult or when it is easy
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।