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सुनन नसाई

नंबर 2948

नंबर 2948किताब 24, नंबर 331
أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالاَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ لاَ يَسْتَلِمُ إِلاَّ الْحَجَرَ وَالرُّكْنَ الْيَمَانِيَ ‏.‏
It was narrated from Ibn Umar:The Prophet used to touch only the Stone and the Yemeni Corner. (Sahih) Chatper 157. Touching The Two Yemeni Corners
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।