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सुनन नसाई

नंबर 2898

नंबर 2898किताब 24, नंबर 281
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، قَالَ إِسْحَاقُ أَنْبَأَنَا وَقَالَ، مُحَمَّدٌ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، قَالَ سَمِعْتُ نَافِعًا، يَقُولُ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَعْبَدِ بْنِ عَبَّاسٍ، حَدَّثَهُ أَنَّ مَيْمُونَةَ زَوْجَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ صَلاَةٌ فِي مَسْجِدِي هَذَا أَفْضَلُ مِنْ أَلْفِ صَلاَةٍ فِيمَا سِوَاهُ مِنَ الْمَسَاجِدِ إِلاَّ الْمَسْجِدَ الْكَعْبَةَ ‏"‏ ‏.‏
Maimunah, the wife of the Prophet said:"I heard the Messenger of Allah say: 'One prayer in this Masjid of mine is better than a thousand prayers in any other Masjid except Al-Masjid Al-Haram
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।