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सुनन नसाई

नंबर 2896

नंबर 2896किताब 24, नंबर 279
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي يَزِيدَ، أَنَّ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ طَارِقِ بْنِ عَلْقَمَةَ، أَخْبَرَهُ عَنْ أُمِّهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا جَاءَ مَكَانًا فِي دَارِ يَعْلَى اسْتَقْبَلَ الْقِبْلَةَ وَدَعَا ‏.‏
Abdur-Rahman bin Tariq bin Alqamah narrated from his mother, that:when the Prophet came to a place in Dar Yala he turned to face the Qiblah and supplicated. (Daif)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।