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सुनन नसाई

नंबर 2882

नंबर 2882किताब 24, नंबर 265
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ، قَا��َ أَنْبَأَنَا شُعْبَةُ، عَنْ قَتَادَةَ، سَمِعْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ، يُحَدِّثُ عَنْ عَائِشَةَ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ خَمْسُ فَوَاسِقَ يُقْتَلْنَ فِي الْحِلِّ وَالْحَرَمِ الْحَيَّةُ وَالْكَلْبُ الْعَقُورُ وَالْغُرَابُ الأَبْقَعُ وَالْحِدَأَةُ وَالْفَأْرَةُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Aishah that the Messenger of Allah said:"There are five kinds of vermin which may be killed out and inside the Haram: Snakes, vicious dogs, speckled Crows, kites, and mice
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।