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सुनन नसाई

नंबर 2871

नंबर 2871किताब 24, नंबर 254
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ كَثِيرٍ أَبُو غَسَّانَ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ الْبَرَّاءِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ قَدِمَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لأَرْبَعٍ مَضَيْنَ مِنْ ذِي الْحِجَّةِ وَقَدْ أَهَلَّ بِالْحَجِّ فَصَلَّى الصُّبْحَ بِالْبَطْحَاءِ وَقَالَ ‏ "‏ مَنْ شَاءَ أَنْ يَجْعَلَهَا عُمْرَةً فَلْيَفْعَلْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn Abbas said:"The Messenger of Allah came on the fourth day of Dhul-Hijjah having entered Ihram for Hajj. He prayed Subh in Al-Batha and said: 'Whoever wants to make it Umrah, let him do so
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।