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सुनन नसाई

नंबर 2864

नंबर 2864किताब 24, नंबर 247
أَخْبَرَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ، عَنْ مُزَاحِمٍ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ خَالِدِ بْنِ أَسِيدٍ، عَنْ مُحَرِّشٍ الْكَعْبِيِّ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم خَرَجَ مِنَ الْجِعِرَّانَةِ لَيْلاً كَأَنَّهُ سَبِيكَةُ فِضَّةٍ فَاعْتَمَرَ ثُمَّ أَصْبَحَ بِهَا كَبَائِتٍ ‏.‏
It was narrated from Muharrish Al-Kabi that:the Prophet set out from Al-Jirranah at night as if he were an ingot of silver (i.e., in whiteness and purity) and perfomed Umrah, then he came back in the mooring as if he had stayed there overnight
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।